अब सही जाती नहीं नाराजगी मुझसे ।
तुम नहीं करते जरा जो बात भी मुझसे ।
टूट कर चाहा तुम्हें हर चीज से बढकर ,
एक तुम ही कर रहे जो दुश्मनी मुझसे ।
चाँद तारे तोड़ कर मैं ला नहीं सकता ,
मांग सकते हो मगर ये जान भी मुझसे ।
देखते हो आजकल तुम इस तरह मुझको ,
पूछता है क्या हुआ हर आदमी मुझसे ।
तुम समझ पाए न सचमुच प्यार को मेरे ,
हो गए जो बेबजह इक अजनबी मुझसे ।
कर दिया शम्मा बुझाकर इक अँधेरा जो ,
चाहते हो तुम अभी भी रौशनी मुझसे ।
माफ़ करना कह गया क्या क्या नहीं तुमसे ,
मान जाओ और करलो दोस्ती मुझसे .
सोमवार, 5 जुलाई 2010
सब का सब तय है
भला बुरा सब का सब तय है ।
फिर भी मन को लगता भय है ।
वक्त हमेशा आता जाता ,
जिसकी अपनी ही इक लय है ।
सबका अपना अपना मकसद ,
हर मकसद का भी आशय है ।
रंग मंच है सारी दुनिया ,
सबका निर्धारित अभिनय है।
किरदारों में सभी लिप्त हैं ,
यही सभी का बस परिचय है ।
जो आया है वह जाएगा ,
हर वस्तु का होता क्षय है ।
प्यार हमेशा रहने वाला ,
नहीं जरा इसमें संशय है ।
बार बार मन घबराता है ,
हर पल बदल रहा निश्चय है ।
कोई जीता नहीं यहाँ पर ,
गर हारा नहीं पराजय है .
फिर भी मन को लगता भय है ।
वक्त हमेशा आता जाता ,
जिसकी अपनी ही इक लय है ।
सबका अपना अपना मकसद ,
हर मकसद का भी आशय है ।
रंग मंच है सारी दुनिया ,
सबका निर्धारित अभिनय है।
किरदारों में सभी लिप्त हैं ,
यही सभी का बस परिचय है ।
जो आया है वह जाएगा ,
हर वस्तु का होता क्षय है ।
प्यार हमेशा रहने वाला ,
नहीं जरा इसमें संशय है ।
बार बार मन घबराता है ,
हर पल बदल रहा निश्चय है ।
कोई जीता नहीं यहाँ पर ,
गर हारा नहीं पराजय है .
लोग समझते हैं
इतनी आसां नहीं जिन्दगी जितना लोग समझते हैं ।
यहाँ समुन्दर कितने सारे प्यासे होंठ तरसते हैं ।
दिन उम्मीदें लेकर आता रात निराशा लाती साथ ,
जब भी कदम बढाओ आगे पीछे कदम खिसकते हैं ।
मन की सूखी धरती पर जब चाह के बादल घिरते हैं ,
लगता हरपल अब बरसेंगे लेकिन नहीं बरसते हैं ।
अपना सबकुछ खोना पड़ता वफ़ा निभाने की खातिर,
इक बेचैनी लिए हमेशा सारी उमर तड़पते हैं ।
आने वाले अच्छे कल के खाब सजाये आँखों में ,
जाने वाले कल के दुःख को विदा ख़ुशी से करते हैं ।
यहाँ समुन्दर कितने सारे प्यासे होंठ तरसते हैं ।
दिन उम्मीदें लेकर आता रात निराशा लाती साथ ,
जब भी कदम बढाओ आगे पीछे कदम खिसकते हैं ।
मन की सूखी धरती पर जब चाह के बादल घिरते हैं ,
लगता हरपल अब बरसेंगे लेकिन नहीं बरसते हैं ।
अपना सबकुछ खोना पड़ता वफ़ा निभाने की खातिर,
इक बेचैनी लिए हमेशा सारी उमर तड़पते हैं ।
आने वाले अच्छे कल के खाब सजाये आँखों में ,
जाने वाले कल के दुःख को विदा ख़ुशी से करते हैं ।
इक इक कर कम होते जाते पैसे सारे दामन के ,
शायद इक के दो हो जाएँ हम उम्मीदें करते हैं .
रविवार, 4 जुलाई 2010
कारावास
उसके बिना जिन्दगी मेरी लगती कारावास है ।
खुशियों के भी बीच हमेशा रहती बड़ी उदास है ।
उसके मेरे बीच सैकड़ों मीलों की लम्बाई है ,
इतनी दूरी होने पर भी लगती दिल के पास है ।
उसके दिल की धड़कन मुझको निकट सुनाई देती है ,
और हरारत का भी मुझको होता अब अहसास है ।
जब भी उसकी याद सताती पलकें नम हो जातीं हैं ,
वह आएगा वापिस इकदिन मुझको ये विश्वासहै ।
धीरे -धीरे जाने कितने साल गुजरते जाते हैं ,
फिर भी दिल उम्मीद लिए इक ,होता नहीं निराश है ।
चारों ओर बराबर मेरे भीड़ बड़ी है लोंगों की ,
लेकिन इनमें नहीं मिला वो जिसकी मुझे तलाश है ।
मैं तो केवल पत्थर भर हूँ मेरा कोई मोल नहीं,
मुझे बना देगा मूरत वह बढ़िया संग तराश है .
खुशियों के भी बीच हमेशा रहती बड़ी उदास है ।
उसके मेरे बीच सैकड़ों मीलों की लम्बाई है ,
इतनी दूरी होने पर भी लगती दिल के पास है ।
उसके दिल की धड़कन मुझको निकट सुनाई देती है ,
और हरारत का भी मुझको होता अब अहसास है ।
जब भी उसकी याद सताती पलकें नम हो जातीं हैं ,
वह आएगा वापिस इकदिन मुझको ये विश्वासहै ।
धीरे -धीरे जाने कितने साल गुजरते जाते हैं ,
फिर भी दिल उम्मीद लिए इक ,होता नहीं निराश है ।
चारों ओर बराबर मेरे भीड़ बड़ी है लोंगों की ,
लेकिन इनमें नहीं मिला वो जिसकी मुझे तलाश है ।
मैं तो केवल पत्थर भर हूँ मेरा कोई मोल नहीं,
मुझे बना देगा मूरत वह बढ़िया संग तराश है .
खुले हुए बालों में
कितनी सुन्दर लगती हो तुम खुले हुए बालों में ।
भंवर सरीखे डिम्पल पड़ते हैं गोरे गालों में ।
नजर उठाकर धीरे से जब मुझे देखती हो ,
खो जाता हूँ मैं कितने ही हंसी ख्यालों में ।
जब कभी गुलाबी होंठों से तुम रस टपकाती हो ,
मानों मरहम लग जाता है दिल के छालों में ।
मोती जैसे दांत चमकते जब भी हंसती हो ,
घिर जाता हूँ मानों किन्हीं तेज उजालों में ।
कभी -कभी जब देह तुम्हारी मदिरा बन जाती है ,
तब जी भर के पीता हूँ मैं मय मद भरे प्यालों में ।
तेरा मेरा रिश्ता क्या है पूछ रही है दुनिया ,
उलझ के रह जाता हूँ में इन कठिन सवालों में .
भंवर सरीखे डिम्पल पड़ते हैं गोरे गालों में ।
नजर उठाकर धीरे से जब मुझे देखती हो ,
खो जाता हूँ मैं कितने ही हंसी ख्यालों में ।
जब कभी गुलाबी होंठों से तुम रस टपकाती हो ,
मानों मरहम लग जाता है दिल के छालों में ।
मोती जैसे दांत चमकते जब भी हंसती हो ,
घिर जाता हूँ मानों किन्हीं तेज उजालों में ।
कभी -कभी जब देह तुम्हारी मदिरा बन जाती है ,
तब जी भर के पीता हूँ मैं मय मद भरे प्यालों में ।
तेरा मेरा रिश्ता क्या है पूछ रही है दुनिया ,
उलझ के रह जाता हूँ में इन कठिन सवालों में .
वक्त खिसकता हुआ चला है
वक्त खिसकता हुआ चला है ।
सुबह का सूरज शाम ढला है ।
जीने को तो सब जीते हैं ,
जीवन जीना मगर कला है ।
अच्छा बुरा वही जाना है ,
अपना जिसमें हुआ भला है ।
मंजिल पर पहुंचा वह राही ,
कदम जमाता हुआ चला है ।
उसका जीवन हुआ सार्थक,
जिसका दामन भर उजला है ।
उसका लेखा क्या रखना है ,
जिसका अगला ना पिछला है ।
प्यार का सागर भारी गहरा ,
लेकिन दिखता भर छिछला है ।
दिल कितना भी पत्थर सा हो ,
अश्कों से हरदम पिघला है ।
जब भी आगे धूपचली है ,
पीछे साया सदा चला है ।
ऐसा हवं भला क्या करना ,
जिसमें अपना हाथ जला है .
सुबह का सूरज शाम ढला है ।
जीने को तो सब जीते हैं ,
जीवन जीना मगर कला है ।
अच्छा बुरा वही जाना है ,
अपना जिसमें हुआ भला है ।
मंजिल पर पहुंचा वह राही ,
कदम जमाता हुआ चला है ।
उसका जीवन हुआ सार्थक,
जिसका दामन भर उजला है ।
उसका लेखा क्या रखना है ,
जिसका अगला ना पिछला है ।
प्यार का सागर भारी गहरा ,
लेकिन दिखता भर छिछला है ।
दिल कितना भी पत्थर सा हो ,
अश्कों से हरदम पिघला है ।
जब भी आगे धूपचली है ,
पीछे साया सदा चला है ।
ऐसा हवं भला क्या करना ,
जिसमें अपना हाथ जला है .
पावन जल
जिस व्यक्ति के पास सुरक्षित कल होता है ।
उसकी अपनी चिंताओं का हल होता है ।
आज अगर कोई खुशहाल दिखाई देता है,
कठिन परिश्रम का उसके ही फल होता है ।
केवल धन के लिए जिन्दगी जीने वाला ,
सच पूछो तो उन्मादी पागल होता है ।
वैसे तो जीवन पानी का एक बुलबुला है ,
मगर कहाँ इतना भर ये केवल होता है ।
बारिश में कम्बल ओढ़े जो भीग रहा है ,
उसकी अपनी चिंताओं का हल होता है ।
आज अगर कोई खुशहाल दिखाई देता है,
कठिन परिश्रम का उसके ही फल होता है ।
केवल धन के लिए जिन्दगी जीने वाला ,
सच पूछो तो उन्मादी पागल होता है ।
वैसे तो जीवन पानी का एक बुलबुला है ,
मगर कहाँ इतना भर ये केवल होता है ।
बारिश में कम्बल ओढ़े जो भीग रहा है ,
उसका भीतर तो सूखा कम्बल होता है ।
कहने को तो गंगा मैली करदी सबने ,
पर पूजा का तो पावन वह जल होता है .
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