सोमवार, 10 मई 2010

इक जमाना

लगता है इक जमाना हरपल तिरे बिना ।
इक साँस भी है जीना मुश्किल तिरे बिना ।
पूछा है आईने ने मुझसे मैं कौन हूँ ,
कुछ भी नहीं है मेरा परिचय तेरे बिना ।
दम तोडती हैं लबपर मायूस हो तबस्सुम ,
आवाज में दरारें पड़गईं तिरे बिना ।
महफ़िल में सितारों की उजालों के कहकहे,
अंधेरों ने छीन लीं हैं खुशियाँ तिरे बिना।
मझदार में है कश्ती डूबेगी मेरी तै है,
कैसे मिलेगा साहिल मुझको तिरे बिना।
लम्बा सफ़र है कितना फिसलन भरी उमर का,
कैसे करूँगा पूरा तनहा तिरे बिना .

7 टिप्‍पणियां:

  1. हिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं ई-गुरु राजीव हार्दिक स्वागत करता हूँ.

    मेरी इच्छा है कि आपका यह ब्लॉग सफलता की नई-नई ऊँचाइयों को छुए. यह ब्लॉग प्रेरणादायी और लोकप्रिय बने.

    यदि कोई सहायता चाहिए तो खुलकर पूछें यहाँ सभी आपकी सहायता के लिए तैयार हैं.

    शुभकामनाएं !


    "टेक टब" - ( आओ सीखें ब्लॉग बनाना, सजाना और ब्लॉग से कमाना )

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  2. आपका लेख पढ़कर हम और अन्य ब्लॉगर्स बार-बार तारीफ़ करना चाहेंगे पर ये वर्ड वेरिफिकेशन (Word Verification) बीच में दीवार बन जाता है.
    आप यदि इसे कृपा करके हटा दें, तो हमारे लिए आपकी तारीफ़ करना आसान हो जायेगा.
    इसके लिए आप अपने ब्लॉग के डैशबोर्ड (dashboard) में जाएँ, फ़िर settings, फ़िर comments, फ़िर { Show word verification for comments? } नीचे से तीसरा प्रश्न है ,
    उसमें 'yes' पर tick है, उसे आप 'no' कर दें और नीचे का लाल बटन 'save settings' क्लिक कर दें. बस काम हो गया.
    आप भी न, एकदम्मे स्मार्ट हो.
    और भी खेल-तमाशे सीखें सिर्फ़ "टेक टब" (Tek Tub) पर.
    यदि फ़िर भी कोई समस्या हो तो यह लेख देखें -


    वर्ड वेरिफिकेशन क्या है और कैसे हटायें ?

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  3. "महफ़िल में सितारों की उजालों के कहकहे,
    अंधेरों ने छीन लीं हैं खुशियाँ तिरे बिना।"
    बहुत खूब

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  4. अच्छी बन पड़ी हैं लाइनें...
    पूछा है आईने ने मुझसे मैं कौन हूँ ,
    कुछ भी नहीं है मेरा परिचय तेरे बिना।

    स्वागत है....

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  5. बहुत बढ़िया ...
    www.jugaali.blogspot.com

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  6. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  7. " बाज़ार के बिस्तर पर स्खलित ज्ञान कभी क्रांति का जनक नहीं हो सकता "

    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति.कॉम "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . अपने राजनैतिक , सामाजिक , आर्थिक , सांस्कृतिक और मीडिया से जुडे आलेख , कविता , कहानियां , व्यंग आदि जनोक्ति पर पोस्ट करने के लिए नीचे दिए गये लिंक पर जाकर रजिस्टर करें . http://www.janokti.com/wp-login.php?action=register,
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