सोमवार, 2 अगस्त 2010

रामायण -13

( ४९ )
इशारा करके विश्वामित्र ने लक्ष्मण को बैठाया ,
फकत इक आँख की जुम्बिश ने जादू अपना दिखलाया ,
मुखातिब राम ने होकर ऋषि ने ऐसे फरमाया ,
तुम्ही पर आँख है सबकी तुम्हीं पर ध्यान है सबका ,
करो संशय निवारण बढ़ो आगे धनुष तोड़ो ,
करो दूर परेशानी कि दिल टूटे हुए जोड़ो ।
( ५० )
सूना जब हुकुम विश्वामित्र का श्री राम जी उठे ,
धनुष की तोड़ने छाती वह सीना तान कर निकले ,
वह चलते थे तो कलियाँ मुसकातीं फूल खिलते थे ,
धनुष को बाजुओं पर उठाया हैरती सब थे ,
कडाके की सदा आई जमीं गूंजी फलक गूंजा ,
हर इक लब पर सदा थी -लो मुबारक हो धनुष है टूटा ।
( ५१ )
बसद नाजो अदा सीता से दरबार फिर आई ,
लिए थी हाथ में माला हर इक उम्मीद बार आई ,
वह क्या आई कि पूरब से कोई ठंडी लहर आई ,
खिला निखिल तमन्ना और वह लेकर मिसर आई ,
जो नहीं गर्दन झुकाई डाल दी माला मानो उसने ,
दिलों की खिल गईं कलियाँ हुए साकार सब सपने ।
( ५२ )
लहर दौड़ी ख़ुशी की देखकर हर मंजे रंगी ,
मसर्रत से ईद कुदरत ने खाली झोलियाँ भर दीं ,
बलाएँ सीता और श्री राम की जाकर हर इक ने लीं ,
फिजा में चार शू श्री राम की जय कार से गूंजीं ,
बजीं शहनाइयां और शादियाने बज गए हर शू ,
गुल अफ्सानी फरिश्तों ने भी की कोई न था बरखू .

1 टिप्पणी:

  1. बहुत बढ़िया चल रहा है..


    एक निवेदन:

    कृपया वर्ड-वेरिफिकेशन हटा लीजिये

    वर्ड वेरीफिकेशन हटाने के लिए:

    डैशबोर्ड>सेटिंग्स>कमेन्टस>Show word verification for comments?>

    इसमें ’नो’ का विकल्प चुन लें..बस हो गया..जितना सरल है इसे हटाना, उतना ही मुश्किल-इसे भरना!! यकीन मानिये.

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