सोमवार, 5 जुलाई 2010

नाराजगी मुझसे

अब सही जाती नहीं नाराजगी मुझसे ।
तुम नहीं करते जरा जो बात भी मुझसे ।
टूट कर चाहा तुम्हें हर चीज से बढकर ,
एक तुम ही कर रहे जो दुश्मनी मुझसे ।
चाँद तारे तोड़ कर मैं ला नहीं सकता ,
मांग सकते हो मगर ये जान भी मुझसे ।
देखते हो आजकल तुम इस तरह मुझको ,
पूछता है क्या हुआ हर आदमी मुझसे ।
तुम समझ पाए न सचमुच प्यार को मेरे ,
हो गए जो बेबजह इक अजनबी मुझसे
कर दिया शम्मा बुझाकर इक अँधेरा जो ,
चाहते हो तुम अभी भी रौशनी मुझसे ।
माफ़ करना कह गया क्या क्या नहीं तुमसे ,
मान जाओ और करलो दोस्ती मुझसे .

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